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Wednesday, December 25, 2019

रविवार को ही छुट्टी क्यों होती है || Sunday ko hi chutti kyo hoti hai

           रविवार (संडे) को ही छुट्टी क्यों होती है                       Why is sunday a Holiday




Sunday-ko-hi-chutti-kyo-hoti-hai-why-sunday-is-holiday
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दोस्तों ये तो हम सब जानते हैं की संडे को छुट्टी होती है पर क्या अपने 

कभी सोचा है की पुरे सप्ताह में 7 दिन होते हैं पर आखिर छुट्टी रविवार 

को ही क्यों होती है। क्या है संडे को अवकाश रखने का इतिहास और 

आज हम ये भी जाने गें की संडे को छुट्टी किसने रखवाई। 




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दोस्तों संडे यानि रविवार हम सब को इस दिन  का बहुत ही बेसब्री से 

इंतज़ार रहता है लोग बहुत से प्लान बनाते हैं घूमने जाते हैं अपने परिवार 

के साथ समय बिताते हैं और कुछ लोग पूरा संडे सो कर गुजार देते हैं  

मेरी तरह 😂😆 पर जो भी हो संडे का दिन सबको पसंद होता है 

न कोई टेंशन न कोई परेशानी लोग मंडे से सैटरडे तक काम कर के थक 

जाते हैं उन्हें भी रिलैक्स होने का टाइम मिल जाता है और एक वैज्ञानिक 

शोध में पता चला है की इंसान को सप्ताह में एक दिन तो छुट्टी मिलनी ही 

चाहिए इससे इंसान को काम से थोड़ी फुर्सत मिलती है और व्यक्ति अगले 

सप्ताह फिर ऊर्जावान होके काम करता है। 



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दोस्तों संडे को ही छुट्टी क्यों होती है इसके कई सरे कारण हैं कुछ तो 

धर्म से जुड़े हुए हैं और कुछ अलग अलग देश की सभ्यता से। पर मै 

आपको सुनी सुनाई बाते नहीं बताऊंगा की हिन्दू धर्म में ये होता है या 

मुस्लिम धर्म में इसलिए माना जाता है या किसी अन्य धर्म में ये माना जाता 

है दोस्तों ये सब सरासर बकवास है ज्यादातर लोग कुछ चीज़ो को इसी 

रूप में देखते है क्युकी उन्हें पता ही नहीं की इसकी असली वजह क्या है 

दोस्तों रविवार को ही छुट्टी क्यों होती है इसके पीछे एक कहानी है एक 

इतिहास है आखिर इस छुट्टी की जरुरत क्यों पड़ी तो आइये बताते हैं 

आपको की Sunday ko hi chutti kyo hoti hai. 

आखिर संडे को ही छुट्टी क्यों होती है इसके पीछे का इतिहास 


दोस्तों इस छुट्टी के पीछे काफी लम्बा संघर्ष किया गया था और कई 

सारी  दुर्घटनाएँ भी हुई आइये हम जानते है रविवार को छुट्टी के रूप 

में घोषित किये जाने के पीछे क्या कारण था। 

आज से कई साल पहले जब भारत में ब्रिटिश शासन था तब यहाँ के मिल 

मजदूरों को सातो दिन कड़ी मेहनत के साथ काम करना पड़ता था और 

उन्हें कोई छुट्टी नहीं मिलती थी जिसके कारण  न तो वो अपने परिवार 

के साथ रह पाते थे और न ही उन्हें कुछ देर आराम करने का मौका 

मिलता था उनकी हालत बहुत ही बुरी थी उन्हें गुलामो के जैसे जिंदगी 

जिनी पड़ रही थी और वह के जो ब्रिटिश अधिकारी थे वो हर रविवार को 

प्राथना के लिए चर्च जाया करते थे। लेकिन मजदूरों के लिए ऐसी कोई भी 

परंपरा नहीं थी उन्हें सातो दिन उसी तरह काम करना पड़ता था। 

तो ये सब सब देख कर वही एक मिल मजदूर के नेता जिनका नाम 

श्री नारायण मेधाजी लोखंडे था उन्होंने अंग्रेजो के सामने एक प्रस्ताव 

रखा साप्ताहिक छुट्टी का उन्होंने अंग्रेजो से कहा की हमलोग अपने 

परिवार और खुद के लिए 7 दिन काम करते हैं तो हमें कम से कम एक 

दिन की छुट्टी तो देनी ही चाहिए जिसमे हम अपने परिवार के साथ समय 

बिना सके या कर सके या फिर कुछ और काम कर सके जैसे देश के 

विकास के लिए कुछ सोच सके या कर सके। इसके साथ ही उन्होंने 

अंग्रेजो से कहा की रविवार को हिन्दू देवता खंडोबा का दिन है तो इस 

दिन साप्ताहिक छुट्टी के रूप में घोषित करना चाहिए। 



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लेकिन उनके इस प्रस्ताव को ब्रिटिश के अधिकारियों  ने अस्वीकार कर 

दिया। पर लोखंडे जी ने हार नहीं मानी और लगातार प्रयास करते रहे 

और आखिर में 7 साल के लम्बे संघर्ष के बाद 10 जून 1890 को ब्रिटिश 

सरकार ने आखिरकार रविवार को छुट्टी का दिन घोषित किया।

और हैरानी की बात तो ये है की भारत सरकार ने अभी तक ऐसा कोई 

भी आदेश जारी नहीं किया और उसी ब्रिटिश सरकार द्वारा किये गए

आदेश से ही संडे को छुट्टी मनाई जा रही है तो ऐसे हुआ था संडे को 

छुट्टी करने का प्रावधान तो अब आप को पता  लग गया होगा की आखिर 

रविवार को ही छुट्टी क्यों होती है। Sunday ko hi chutti kyo hoti hai. 

तो दोस्तों आशा करता हु आपको ये जानकारी पसंद आयी होगी तो अपने 

दोस्तों के साथ जरूर शेयर करें।






                                 Dhanyawaad

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